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Pinki will stand on her feet and single handedly raise and nurture her children.

Pinki had no idea about the tragedy which was going to befall on her family on the morning of 28th April, 2021 at 4 AM when her 28 year old husband Rajneesh breathed his last after a long arduous struggle with covid-19 and left for his heavenly abode; He was survived by his mother, father, 25 year old wife, 6 year old son and 2 year old daughter. All efforts of family members to secure him admission in hospital did not succeed and due to lack of appropriate medical care he succumbed to covid-19. Rajneesh was the sole breadwinner of the family and after his death the family’s survival was at stake. Sitting in the verandah of house his mother and wife were sobbing and his wife wiping her tears said “पूरी जिंदगी इनके (पति) बिना कैसे कटेगी नहीं पता मुझे. दो छोटे बच्चे हैं सास-ससुर हैं सबको अब मुझे ही देखना है. हिम्मत नहीं है जीने की पर इनके लिए जिंदा रहना पड़ेगा.” His father used to work as ironer before, however after Rajneesh’s death he started staying unwell as a result of which his iron shop had to be closed. With a quavering voice and a lump in her throat Pinki points towards her cosmetic shop and says, “अभी 2 अगस्त को बेटी के नाम से ये दुकान शुरू की है. बदलाव संस्था ने इस दूकान को शुरू करने में सहयोग दिए, जिससे . बच्चों को पाल सकूँ.”  Rajneesh’s mother while looking at her daughter in law and grandchildren says “अब इन्ही को देखकर अपनी बची जिंदगी काट लूंगी. बहु के ये शौक के दिन थे, इन बच्चों को अपने बाप के प्यार और साये की जरूरत थी पर अब भगवान ही हमसे रूठ गये तो क्या कर सकते हैं.”  She further adds, “घर की ऐसी स्थिति है अब आपको क्या बताऊं, जबसे बेटा मरा है तबसे पड़ोसी और रिश्तेदार गेहूं चावल पहुंचा देते हैं. सबकी मदद से घर खर्च चल रहा है. ये भी बेटे के जाने के बाद से बहुत बीमार रहने लगे हैं, घर में अब कमाने वाला कोई नहीं बचा है. अगर इस संस्था सहयोग  नहीं मिलता तो शायद हम ये दुकान भी बहु को न करवा पाते. अब कम से कम एक उम्मीद तो है कि अगर ये दुकान चल गयी तो रोज के खर्चे निकल आएंगे.” Pinki shares her shop experience by saying, “कितना भी दुःख हो पर जब दुकान पर बैठती हूँ तो ग्राहकों से खुश होकर ही बोलना पड़ता है. बच्चों के सामने कभी आंसू नहीं आने देती हूँ. जानती हूँ पति के बिना जीवन मुश्किल है पर शायद यहीं तक उनका साथ था.”